चलिए सब से पहले "नेट न्युट्रालिटी" विस्तरण करते हे
"नेट" का मतलब तो आप सब जानते ही होंगे. "इन्टरनेट"
और
"न्युट्रालिटी" का मतलब हे तटस्थता
"नेट न्युट्रालिटी" का मतलब हे इन्टरनेट की तटस्थता. एसा मानिए के यह चीज़ जो लागू हुई हे वो फ़ोन लाइन की तरह हे. अगर आप किसी से बात करना चाहते हो तो आप सीधा नंबर डायल करके उस आदमी से बात कर सकते हो. उसमे आपको कोई प्रतिबन्ध नहीं हे की आप उस टेलीफोन से सिर्फ आपके रिश्तेदार के साथ ही बात कर सकते हो. आप जब टेलीफोन की सर्विस लेते हो तो आपको ये नहीं पूछा जाता की आप किस किसको फ़ोन करने वाले हे.
� ीक उसी तरह "नेट न्युट्रालिटी" भी वही हे. कोई भी इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर कम्पनी आपके ऊपर किसी भी वेबसाइट को एक्सेस करने पर प्रतिबन्ध नहीं लगा सकती. हा अगर सरकार की तरफ से बयान दिया गया हो तो बात कुछ और हे.
अगर "नेट न्युट्रालिटी" लागु नहीं पड़ता तो आइसपी कंपनी के पास कंट्रोल आ जाता हे. वो एक्सेस कंट्रोल भी हो सकता हे या स्पीड कंट्रोल भी हो सकता हे. "नेट न्युट्रालिटी" के ना हो तो आइसपी तेय कर सकता हे की कौनसी वेबसाइट मेरा कस्टमर देख सकता हे और कौनसी नहीं. कौनसी वेबसाइट ज्यादा स्पीड से लोड कर सकता हे कौनसी वेबसाइट लो स्पीड पे लोड करनी हे.
इस कंट्रोल के तहेत आइसपी वेबसाइट ओनर के पास पैसा मांग सकता हे. अब मान लीजिये आपकी खुद की वेबसाइट हे तो अलग अलग आइसपी कम्पनी आपको ऑफर दे सकती हे की आप हमें पैसे दीजिये तो हम आपकी वेबसाइट की लोड स्पीड बढ़ा देंगे या फिर हमारे कस्टमर को एक्सेस करने देंगे.
ये सारी चीजों से बचने के लिए "नेट न्युट्रालिटी" रूल का इस्तेमाल किया जाता हे. भारत में २०१५ के अनुसार, भारत में एसा कोई लॉ नहीं हे इसी लिए कुछ आइसपी कंपनी इसका उल्लंघन कर रही हे.

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